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मेथी मतलब ‘कसूरी मेथी’, 90% लोगों को नहीं पता होगा सही जवाब

 

– मेथी यानि कसूरी मेथी… अगर आप भी इसी बात से इत्तेफाक रखते हैं कि दोनों एक ही पौधे का अलग रूप हैं। तो जनाब आप उन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें यह जानने की जरूरत है कि हर मेथी ‘कसूरी मेथी’ नहीं होती।

सदियों से किचन में मेथी, कसूरी मेथी और मेथी दाने का इस्तेमाल होता आया है। व्यंजनों में स्वाद और लाजवाब खुशबू लाने वाली मेथी हेल्थ के लिहाज से भी फायदेमंद मानी जाती है। हालांकि, लोगों का मानना है कि मेथी को सुखाकर ही कसूरी मेथी बनाई जाती है, परंतु ऐसा नहीं है। अक्सर इसके नाम के कंफ्यूजन को लेकर लोग दोनों को एक ही समझने की गलती कर बैठते हैं। जबकि दोनों के बीज और पत्ती के आकार के साथ ग्रोथ रेट में भी बहुत अंतर होता है। इस लेख के जरिए आप यह जानेंगे कि इसके इस्तेमाल से लेकर, बीजों के आकार, वानस्पतिक प्रकृति और ग्रोथ रेट तक में दोनों में जमीन-आसमान का अंतर होता है।

 

किस्म और ग्रोथ रेट से होती है पहचान

मेथी और कसूरी मेथी की पहचान उनकी वानस्पतिक किस्म और ग्रोथ रेट से होती है। दरअसल कसूरी मेथी एक स्लो ग्रोइंग वैरायटी का पौधा है। जो न केवल धीरे-धीरे बढ़ता है बल्कि इसकी पत्तियां साधारण मेथी की तुलना में छोटी और तेज खुशबू वाली होती हैं। दूसरी तरफ कॉमन मेथी एक फास्ट ग्रोइंग वैरायटी है। इसका पौधा तेजी से बढ़ता है, जो सब्जी के लिए इस्तेमाल होता है और बाद में इसके बीजों के लिए उगाया जाता है।

 

बीजों का आकार और बनावट भी है वजह


दोनों की किस्मों में अंतर कर पाने में बीज एक कमाल का रोल निभाते हैं। सबसे आसान तरीकों से पहचाने जाने वाले बीज अक्सर फलियों की बनावट पर निर्भर करते हैं। बात करें अंतर की तो कसूरी मेथी के बीज साधारण मेथी की तुलना में छोटे और पतले होते हैं। जबकि साधारण मेथी के बीज, जिन्हें हम मेथी दाना भी कहते हैं मोटे और बड़े होते हैं। आसान लफ़जों में कहें तो सामान्य मेथी में लंबे-लंबे सीड पॉड आते हैं, जिनमें मोटे बीज होते हैं।

 

 

फूल और फलियों का रंग व किस्म

इनके पौधों पर खिलने वाले फूल से भी दोनों किस्मों की पहचान आसानी से की जा सकती है। कसूरी मेथी में जहां येलो-ऑरेंज कलर के फूल आते हैं। इनकी खासियत बीज लेने से ज्यादा इसकी सुगंधित पत्तियों में होती हैं। वहीं कॉमन मेथी में सफेद कलर के फूल आते हैं। इन फूलों के बाद ही पौधे पर लंबे-लंबे सीड-पॉड लगते हैं, जिनसे बीजों को ग्रोथ मिलती है। यही वजह है कि इसके पत्ते और बीज दोनों काम में लिए जाते हैं।

 

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मौसम और उगाने का समय

जिस तरह कूसरी मेथी और मेथी की जरूरतें डिफरेंट होती हैं, उसी तरह इन्हें उगाने के समय में सही मौसम का होना भी जरूरी है। कसूरी मेथी एक अनोखी किस्म का पौधा है, ग्रोथ रेट सही होने के साथ-साथ इसकी खुशबू की बरकरार रह सकें, ऐसे में सर्दी कसूरी मेथी को उगाने का सबसे सही समय माना जाता है। कॉमन मेथी को तो आप किसी भी सीजन में उगा सकते हैं। बावजूद इसके बेहतरीन उपज के लिए अक्सर इसे ठंडे मौसम में उगाया जाता है।

 

सुंगध और उसका इस्तेमाल

​कसूरी मेथी की पत्तियां सूखने के बाद तेज, तीखी और खास सुगंध रखती हैं। इसका उपयोग मुख्य रूप से सूखे मसाले के रूप में, भारतीय करी, दाल और तंदूरी व्यंजनों में स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसकी पत्तियों को सीधे सब्जी के रूप में नहीं खाया जाता। जबकि सामान्य मेथी की पत्तियां सब्जी बनाने या पराठे में भरकर खाने के लिए इस्तेमाल होती हैं। इसकी सुगंध कसूरी मेथी जितनी तेज नहीं होती। इसके बीज यानी मेथी दाना तड़का लगाने, आचार बनाने के लिए इस्तेमाल होते हैं।

 

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